नैनो और जैव उर्वरकों से बदलेगी खेती की तस्वीर
ग्वालियर की सहकारी संगोष्ठी में किसानों तक नई तकनीक पहुंचाने का आह्वान-70 सहकारी समिति प्रबंधकों ने लिया प्रशिक्षण, विशेषज्ञ बोले— लागत घटेगी, उत्पादन बढ़ेगा और मृदा-पर्यावरण भी रहेगा सुरक्षित

ग्वालियर। खेती को अधिक लाभकारी, टिकाऊ और पर्यावरण अनुकूल बनाने की दिशा में ग्वालियर में आयोजित सहकारी संगोष्ठी में नैनो एवं जैव उर्वरकों के व्यापक उपयोग पर विशेष जोर दिया गया। इफको के तत्वावधान में कृषि विज्ञान केंद्र में आयोजित इस संगोष्ठी में जिले की विभिन्न सहकारी समितियों के 70 समिति प्रबंधकों ने भाग लिया। विशेषज्ञों ने कहा कि आधुनिक कृषि तकनीकों को किसानों तक पहुंचाने में सहकारी समितियों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है और नैनो उर्वरकों के उपयोग से खेती की लागत घटाने के साथ उत्पादन में भी उल्लेखनीय वृद्धि संभव है।
मृदा संरक्षण और सतत कृषि के लिए नैनो तकनीक जरूरी
संगोष्ठी को संबोधित करते हुए संयुक्त संचालक कृषि श्री आर.एस. शाक्यवार ने कहा कि मृदा स्वास्थ्य संरक्षण एवं सतत कृषि विकास के लिए नैनो और जैव उर्वरकों का अधिकाधिक उपयोग समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि किसानों को नई तकनीकों से जोड़ने में सहकारी समितियां प्रभावी माध्यम बन सकती हैं।
किसानों तक पहुंचें उन्नत उत्पाद और नई जानकारी
राज्य विपणन प्रबंधक, इफको भोपाल डॉ. डी.के. सोलंकी ने सहकारी समितियों से इफको के उन्नत कृषि उत्पादों को अधिक से अधिक किसानों तक पहुंचाने और प्रभावी व्यावसायिक योजना के माध्यम से अपनी गतिविधियों का विस्तार करने का आह्वान किया। उन्होंने प्रशिक्षण के दौरान प्राप्त तकनीकी जानकारी को किसानों तक पहुंचाने पर भी विशेष बल दिया।
लागत कम, उत्पादन अधिक और पर्यावरण सुरक्षित
क्षेत्रीय प्रबंधक, इफको ग्वालियर श्री आर.के. महोलिया ने कहा कि नैनो यूरिया, नैनो डीएपी, नैनो जिंक, नैनो कॉपर, जैव उर्वरक, सागरिका एवं नेचुरल पोटाश जैसे उत्पाद खेती में नई क्रांति ला सकते हैं। इनके उपयोग से किसानों की लागत कम होगी, उत्पादन में वृद्धि होगी और मृदा, जल तथा पर्यावरण संरक्षण को भी मजबूती मिलेगी।
संतुलित उर्वरक उपयोग पर विशेषज्ञों का जोर
कृषि विज्ञान केंद्र के प्रमुख एवं वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. एस.एस. कुशवाह ने किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग के साथ जैव एवं नैनो उर्वरकों को अपनाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाकर ही भविष्य की चुनौतियों का प्रभावी समाधान संभव है।
सहकारी समितियां बनें किसानों की बहुउद्देशीय सहयोगी
उप आयुक्त, सहकारिता श्री अखिलेश शुक्ला ने सहकारी समितियों से किसानों को गुणवत्तापूर्ण कृषि आदान उपलब्ध कराने का आह्वान किया। वहीं जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री हिमांशु खाड़े ने कहा कि बदलते समय में सहकारी समितियों को केवल उर्वरक वितरण तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि बहुउद्देशीय संस्थाओं के रूप में किसानों को विविध सेवाएं उपलब्ध करानी चाहिए।
ये अधिकारी रहे उपस्थित
संगोष्ठी में कृषि विज्ञान केंद्र के प्रमुख एवं वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. एस.एस. कुशवाह, सहायक संचालक कृषि श्री पचौरी सहित इफको एवं सहकारिता विभाग के अनेक अधिकारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम में आधुनिक कृषि तकनीकों को गांव-गांव तक पहुंचाने और किसानों को उन्नत खेती के लिए प्रेरित करने पर विशेष जोर दिया गया।


