धर्म डेस्क। सनातन परंपरा में राधा अष्टमी का विशेष धार्मिक महत्व है। मान्यता है कि भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को राधा रानी का प्राकट्य हुआ था। इस वर्ष राधा अष्टमी का पावन पर्व 19 सितंबर 2026 को मनाया जाएगा।
इस दिन श्रद्धालु व्रत रखकर राधा रानी और भगवान श्रीकृष्ण की विधि-विधान से पूजा करते हैं। धार्मिक मान्यता है कि श्रद्धापूर्वक किशोरी जी की आराधना करने से जीवन में प्रेम, सुख-शांति और सौभाग्य का संचार होता है। घर के मंदिर में राधा रानी की प्रतिमा स्थापित करते समय दिशा और प्रतिमा के स्वरूप का ध्यान रखना भी महत्वपूर्ण माना गया है।
इस दिशा में स्थापित करें राधा रानी की मूर्ति
वास्तु मान्यताओं के अनुसार, घर के मंदिर में राधा रानी की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करने के लिए उत्तर-पूर्व यानी ईशान कोण को सबसे शुभ माना जाता है। धार्मिक परंपरा में ईशान कोण को देवी-देवताओं का स्थान और सकारात्मक ऊर्जा का केंद्र माना गया है।
इस दिशा में राधा-कृष्ण की प्रतिमा स्थापित कर नियमित पूजा-अर्चना करने से घर में सुखद और भक्तिमय वातावरण बने रहने की मान्यता है।
दक्षिण दिशा में प्रतिमा रखने से बचें
वास्तु मान्यताओं के अनुसार, राधा रानी की मूर्ति को दक्षिण दिशा में स्थापित नहीं करना चाहिए। धार्मिक परंपराओं में इस दिशा को पितरों से संबंधित माना गया है। इसलिए पूजा स्थल या देवी-देवताओं की प्रतिमा के लिए उत्तर-पूर्व दिशा को प्राथमिकता देने की सलाह दी जाती है।
हालांकि, पूजा में दिशा से अधिक श्रद्धा, शुद्धता और सकारात्मक भाव को महत्वपूर्ण माना गया है।
अकेली नहीं, श्रीकृष्ण के साथ रखें प्रतिमा
धार्मिक मान्यता के अनुसार, घर के मंदिर में राधा रानी की अकेली मूर्ति रखने के बजाय भगवान श्रीकृष्ण के साथ उनका युगल स्वरूप स्थापित करना अधिक शुभ माना जाता है। राधा-कृष्ण का स्वरूप प्रेम, समर्पण और आध्यात्मिक एकता का प्रतीक है।
प्रतिमा स्थापित करते समय इन बातों का भी ध्यान रखें—
मूर्ति खंडित या चटकी हुई नहीं होनी चाहिए।
प्रतिमा का स्वरूप सौम्य, प्रसन्न और करुणामयी होना चाहिए।
पूजा स्थल स्वच्छ और व्यवस्थित रखें।
प्रतिमा को सीधे जमीन पर न रखें; स्वच्छ चौकी या आसन का प्रयोग करें।
प्रतिमा के आसपास अनावश्यक या टूटी हुई वस्तुएं न रखें।
खंडित मूर्ति की पूजा से बचें
यदि मंदिर में रखी राधा रानी या राधा-कृष्ण की प्रतिमा खंडित हो गई है तो धार्मिक परंपराओं के अनुसार उसकी नियमित पूजा नहीं करनी चाहिए। ऐसी प्रतिमा को सम्मानपूर्वक किसी पवित्र स्थान पर विसर्जित कर नई प्रतिमा स्थापित करने की सलाह दी जाती है।
राधा अष्टमी का पूजा मुहूर्त
पंचांग आधारित विवरणों के अनुसार, राधा अष्टमी की पूजा का शुभ समय 19 सितंबर को सुबह 11:01 बजे से दोपहर 1:28 बजे तक रहेगा। स्थानीय पंचांग और स्थान के अनुसार समय में थोड़ा अंतर संभव है। तिथि और पूजा मुहूर्त का विवरण
नोट: दिशा और प्रतिमा से जुड़ी बातें धार्मिक एवं वास्तु मान्यताओं पर आधारित हैं।





